संपादकीय लेखक – निर्मित द्विवेदी (गोपाल) लोकतंत्र केवल चुनाव जीतने का माध्यम नहीं, बल्कि जनता की आवाज़...
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……पण्डित प्रदीप शुक्ल “जब छात्र सड़कों पर हों, संसद मौन हो और सत्ता बैरिकेडों के पीछे खड़ी...
……पण्डित प्रदीप शुक्ल स्वतंत्र भारत में परीक्षा-लीक और रद्दीकरणों का कोई एक केंद्रीकृत राष्ट्रीय “मास्टर-लिस्ट” सार्वजनिक रूप...
“जो दूसरों की आवाज़ बनता है, उसकी अपनी आवाज़ अक्सर भीड़ में खो जाती है।” निर्मित द्विवेदी...
……पण्डित प्रदीप शुक्ल # इतिहास के पन्नों पर दर्ज होता एक विरोध संसद के मानसून सत्र के...
…..पण्डित प्रदीप शुक्ल “जब ईंधन की बचत, उपभोक्ता की जेब और सरकार का दावा एक-दूसरे से टकराने...
……पण्डित प्रदीप शुक्ल “जौहर विश्वविद्यालय पर कार्रवाई कानून की कसौटी है, या सत्ता की भाषा”? उत्तर प्रदेश...
…..पण्डित प्रदीप शुक्ल किसी भी लोकतांत्रिक राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसकी संसद की भव्यता से नहीं, बल्कि...
…….पण्डित प्रदीप शुक्ल “जिस कैमरे के लेंस में तुम अपनी पूरी ज़िंदगी ढूँढ रहे हो, उसे केवल...
…….पण्डित प्रदीप शुक्ल देश में महंगाई अब कोई क्षणिक समस्या नहीं रह गई है, वह एक स्थायी...
