अफगानिस्तान के कृषि मंत्री ओमारी इस समय भारत आए हुए हैं। दिल्ली दौरे पर उनका जिस तरह से भव्य स्वागत किया गया उससे वो काफी प्रभावित हैं।
* पाकिस्तान से टेंशन के बीच अफगान मंत्री ने भारत के साथ संबंधों पर दिल छू लेने वाली बात कही है।

इंडोनेशिया से अफगानिस्तान तक: भारत की हजारों वर्षों पुरानी सभ्यतागत विरासत आज भी बना रही है मजबूत रिश्ते
● इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने भारत यात्रा के दौरान कहा कि उन्होंने DNA टेस्ट कराया और पाया कि उनके DNA में भारतीय मूल के तत्व हैं। उन्होंने कहा कि भारत से उनका एक विशेष सांस्कृतिक जुड़ाव है।
● भारत दौरे पर आए अफगानिस्तान के कृषि, सिंचाई एवं पशुधन मंत्री मौलवी अताउल्लाह ओमारी ने कहा, “हमारा DNA एक है।” उन्होंने भारत सरकार द्वारा दिए गए गर्मजोशी भरे स्वागत की भी सराहना की।
● दोनों नेताओं के ये बयान केवल भावनात्मक नहीं, बल्कि भारत और एशिया के बीच हजारों वर्षों से चले आ रहे सभ्यतागत संबंधों की याद दिलाते हैं।
भारत–ईरान–अफगानिस्तान का प्राचीन संबंध
● भारत और प्राचीन फारस (ईरान) की जड़ें इंडो-ईरानी सभ्यता से जुड़ी रही हैं।
● संस्कृत और अवेस्ता जैसी प्राचीन भाषाओं में कई समानताएँ आज भी देखने को मिलती हैं।
● अफगानिस्तान प्राचीन काल में भारत, मध्य एशिया और फारस को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण व्यापारिक और सांस्कृतिक केंद्र था।
● कंधार, बल्ख और हेरात जैसे शहर ज्ञान, व्यापार और संस्कृति के प्रमुख केंद्र थे।
भारत–इंडोनेशिया का हजारों वर्षों पुराना रिश्ता
● लगभग 2,000 वर्ष पहले भारतीय व्यापारी समुद्री मार्ग से जावा, सुमात्रा और बाली तक पहुँचे।
● व्यापार के साथ-साथ भारतीय संस्कृति, भाषा, कला, स्थापत्य, प्रशासन और आध्यात्मिक परंपराओं का भी प्रसार हुआ।
● आज भी इंडोनेशिया, विशेषकर बाली और जावा में रामायण और महाभारत का सांस्कृतिक प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है।
● इंडोनेशिया के अनेक स्थानों, परंपराओं और राष्ट्रीय प्रतीकों पर संस्कृत का प्रभाव आज भी मौजूद है।
व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान
● प्राचीन समुद्री व्यापार मार्ग भारत, ईरान, अफगानिस्तान और दक्षिण-पूर्व एशिया को जोड़ते थे।
● मसाले, वस्त्र, धातुएँ, मोती और अन्य वस्तुओं का व्यापक व्यापार होता था।
● व्यापारी, विद्वान और संत ज्ञान, दर्शन और संस्कृति का भी आदान-प्रदान करते थे।
आधुनिक कूटनीति में प्राचीन विरासत की भूमिका
● आज भारत के इंडोनेशिया, अफगानिस्तान और एशिया के अनेक देशों के साथ मजबूत संबंधों की नींव केवल रणनीतिक हित नहीं, बल्कि साझा सभ्यतागत विरासत भी है।
● सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंध आज भी व्यापार, शिक्षा, पर्यटन और कूटनीतिक सहयोग को नई मजबूती दे रहे हैं।
इंडोनेशिया के राष्ट्रपति का भारतीय मूल का उल्लेख और अफगान मंत्री का “हमारा DNA एक है” कहना इस बात का प्रतीक है कि भारत का सभ्यतागत प्रभाव हजारों वर्षों से एशिया को जोड़ता रहा है।
आधुनिक भारत की कूटनीति केवल वर्तमान पर नहीं, बल्कि अपनी प्राचीन सांस्कृतिक विरासत और साझा इतिहास की मजबूत नींव पर भी आगे बढ़ रही है।
