अयोध्या। न्यायालय से पूर्व सांसद एवं भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह को राहत मिलने के बाद उनके समर्थकों में खुशी का माहौल देखने को मिला। समर्थकों ने इस अवसर पर मिठाइयां बांटकर प्रसन्नता व्यक्त की तथा उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। समर्थकों का कहना है कि न्यायालय का यह निर्णय भारतीय न्यायपालिका की निष्पक्षता और संविधान के प्रति उनकी आस्था को और अधिक मजबूत करता है।

समर्थकों ने कहा कि भारत की न्याय व्यवस्था विश्व की सबसे सशक्त लोकतांत्रिक संस्थाओं में से एक है, जहां प्रत्येक व्यक्ति को निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार प्राप्त है। उनका कहना था कि न्यायिक प्रक्रिया पर विश्वास बनाए रखना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है और अदालत के निर्णयों का सम्मान लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए आवश्यक है।
समर्थकों ने अपने वक्तव्य में कहा कि “सत्यमेव जयते” केवल राष्ट्र का आदर्श वाक्य नहीं, बल्कि भारतीय न्याय व्यवस्था की मूल भावना भी है। उनका कहना था कि सत्य और न्याय की जीत से समाज में कानून के प्रति लोगों का विश्वास और अधिक मजबूत होता है।
उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति पर लगाए गए आरोपों का अंतिम निष्कर्ष न्यायालय की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आता है। इसलिए समाज के प्रत्येक वर्ग को न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करना चाहिए और किसी भी मामले में अंतिम निर्णय आने से पहले संयम एवं जिम्मेदारी का परिचय देना चाहिए।
समर्थकों ने ईश्वर से प्रार्थना की कि समाज में सत्य, न्याय और सद्भाव की भावना बनी रहे तथा भविष्य में किसी भी सम्मानित व्यक्ति को बिना पर्याप्त तथ्यों और साक्ष्यों के अनावश्यक विवादों या आरोपों का सामना न करना पड़े। उन्होंने सभी नागरिकों से भी अपील की कि न्यायालय के निर्णयों का सम्मान करें, सामाजिक सौहार्द बनाए रखें और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर अपना विश्वास कायम रखें।
इस अवसर पर समर्थकों ने कहा कि भारतीय न्यायपालिका पर देशवासियों का विश्वास लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है और निष्पक्ष न्याय व्यवस्था ही संविधान की गरिमा एवं नागरिकों के अधिकारों की रक्षा का आधार है।
