लखीमपुर खीरी उत्तर प्रदेश अनूप भास्कर
एसडीएम व तहसीलदार के निर्देशों के बावजूद नहीं हो रहे कार्य, मुख्य मार्ग जाम कर अधिवक्ताओं ने जताया आक्रोश
पलिया कलां। तहसील परिसर में शुक्रवार को भ्रष्टाचार और मनमानी के विरोध में अधिवक्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा। बड़ी संख्या में वकीलों ने लेखपालों पर रिश्वतखोरी, लापरवाही और मनमाने ढंग से काम करने के आरोप लगाते हुए जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने तहसील के मुख्य मार्ग पर जाम लगा दिया, जिससे आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया। जाम के चलते आम लोगों, वादकारियों और ग्रामीणों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा, वहीं तहसील का कामकाज भी प्रभावित रहा।

प्रदर्शनकारी अधिवक्ताओं का आरोप था कि तहसील में बिना रिश्वत दिए किसानों और आम नागरिकों के राजस्व संबंधी कार्य नहीं किए जा रहे हैं। उनका कहना था कि नामांतरण, विरासत, पैमाइश, रिपोर्ट और अन्य जरूरी मामलों में लोगों को बार-बार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। कई मामलों में महीनों तक फाइलें लंबित रखी जा रही हैं, जिससे ग्रामीणों और किसानों को आर्थिक एवं मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि एसडीएम और तहसीलदार द्वारा निर्देश दिए जाने के बाद भी कई लेखपाल कार्य करने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना था कि वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों की भी अनदेखी की जा रही है, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं और आम जनता का विश्वास प्रभावित हो रहा है।
प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने जमकर नारेबाजी करते हुए तहसील प्रशासन के खिलाफ अपना रोष व्यक्त किया। उन्होंने भ्रष्टाचार में लिप्त कर्मचारियों के विरुद्ध निष्पक्ष जांच कर कठोर कार्रवाई की मांग की। अधिवक्ताओं का कहना था कि यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा तथा इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
मुख्य मार्ग पर जाम लगने से काफी देर तक वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं। तहसील परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। सूचना मिलने पर प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों से वार्ता कर स्थिति सामान्य कराने का प्रयास किया।
अधिवक्ताओं ने कहा कि उनका आंदोलन किसी व्यक्तिगत विरोध के लिए नहीं, बल्कि तहसील में व्याप्त भ्रष्टाचार और आम जनता के हितों की रक्षा के लिए है। उनका कहना था कि जब तक रिश्वतखोरी पर प्रभावी अंकुश नहीं लगाया जाता और किसानों व आम नागरिकों के कार्य पारदर्शी एवं समयबद्ध तरीके से नहीं किए जाते, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
