
तरुण कुमार ब्यूरो चीफ
बरेली । बरेली की बहेड़ी पुलिस ने जमीन दिलाने के नाम पर लाखों रुपये की ठगी के आरोप में पूर्व विधानसभा प्रत्याशी नसीम अहमद समेत पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। मामला एक धान व्यापारी की शिकायत पर दर्ज हुआ है। पुलिस ने धोखाधड़ी, मारपीट और जान से मारने की धमकी समेत विभिन्न धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
दातागंज थाना क्षेत्र के गांव नेताझुकसा निवासी धान व्यापारी रामप्रसाद ने एसएसपी को दी शिकायत में बताया कि वह देवचरा बाजार में धान का कारोबार करते हैं। उनके अनुसार, विजय नाम के व्यक्ति ने बताया कि एक कंपनी यहां जमीन खरीदना चाहती है। इसके बाद गिरी और अजीत ने खुद को कंपनी का मैनेजर बताकर जमीन उपलब्ध कराने पर कमीशन देने का भरोसा दिलाया।
11.50 लाख दिखाकर जीता भरोसा
रामप्रसाद का आरोप है कि आरोपियों ने भरोसा दिलाने के लिए नसीम अहमद के सामने छह लाख रुपये का चेक और साढ़े पांच लाख रुपये नकद दिखाए। इस पर विश्वास कर उन्होंने भी आरोपियों को रकम दे दी। आरोप है कि पैसा लेने के बाद सभी आरोपियों ने अपने मोबाइल बंद कर लिए।
शिकायतकर्ता के मुताबिक, 28 मार्च 2025 को वह नसीम अहमद के घर रुपये मांगने पहुंचे तो वहां उनके साथ गाली-गलौज, मारपीट और जान से मारने की धमकी दी गई। इसके बाद 21 अप्रैल 2025 को उन्होंने पुलिस को तहरीर दी। उनका कहना है कि आरोपियों ने तीन लाख रुपये वापस किए, लेकिन बाकी रकम लौटाने का वादा नहीं निभाया ।
रुपये मांगने पर मारपीट का आरोप
पुलिस ने रामप्रसाद की तहरीर के आधार पर बाबू मुनीम, गिरी, अजीत, विजय और नसीम अहमद के खिलाफ धोखाधड़ी, मारपीट और जान से मारने की धमकी समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मामले में नामजद पूर्व विधानसभा प्रत्याशी नसीम अहमद ने सभी आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि शिकायतकर्ता ने छह लाख रुपये का चेक दिया था, लेकिन खाते में पर्याप्त राशि न होने के कारण वह भुनाया नहीं जा सका। उन्होंने दावा किया कि उन्हें मिले तीन लाख रुपये आरटीजीएस के जरिए शिकायतकर्ता के खाते में वापस कर दिए गए थे।
नसीम अहमद बोले- आरोप बेबुनियाद
नसीम अहमद के अनुसार, बाद में दोनों पक्षों के बीच समझौता भी हो गया था और तहसील परिसर में नोटरी स्टाम्प पर शिकायतकर्ता ने लिखित रूप से स्वीकार किया था कि दोनों के बीच कोई लेन-देन शेष नहीं है। उनका आरोप है कि विधानसभा चुनाव लड़ने की घोषणा के बाद राजनीतिक विरोधी उन्हें बदनाम करने के लिए झूठा मुकदमा दर्ज करा रहे हैं। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
