
आगरा ब्यूरो कार्यालय संवाददाता
हाईकोर्ट के आदेशों का हवाला देकर शिकायतकर्ता ने उठाए सवाल, छावनी परिषद से निर्माण की अनुमति से लेकर स्वीकृत नक्शे तक पूरा रिकॉर्ड मांगा
आगरा। छावनी क्षेत्र की संपत्ति संख्या 109/123 पर कथित निर्माण ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। संपत्ति को लेकर न्यायालय में विवाद और हाईकोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए सुल्तानपुरा निवासी फिरोज अली खान ने आरोप लगाया है कि विवादित संपत्ति पर निर्माण कार्य कराया जा रहा है। उन्होंने आगरा पुलिस कमिश्नर को शिकायत भेजकर पूरे मामले की जांच और निर्माण से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल कराने की मांग की है।
मरम्मत की अनुमति थी तो नया निर्माण कैसे?
शिकायतकर्ता के आरोपों का सबसे अहम बिंदु कथित 2019-बी सेक्शन के तहत जारी रिपेयरिंग अनुमति है। उनका सवाल है कि अगर अनुमति सिर्फ मरम्मत के लिए थी तो मौके पर पुराने भवन को हटाकर नए सिरे से निर्माण किस स्वीकृति के आधार पर कराया जा रहा है?
यही सवाल अब छावनी परिषद की अनुमति प्रक्रिया पर भी खड़ा हो गया है। शिकायतकर्ता ने परिषद से संबंधित अनुमति पत्र की प्रति सार्वजनिक करने के साथ यह बताने की मांग की है कि कितने क्षेत्रफल में और किस प्रकार के निर्माण की स्वीकृति दी गई थी।
नक्शा, सेक्शन प्लान और ऑथराइज्ड पर्सन लेटर पर सवाल
फिरोज अली खान का दावा है कि संबंधित संपत्ति के निर्माण से जुड़े स्वीकृत नक्शे, सेक्शन प्लान और ऑथराइज्ड पर्सन लेटर की स्थिति स्पष्ट नहीं है। उनका कहना है कि जब तक मूल दस्तावेज सामने नहीं आते, तब तक निर्माण की वैधता को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब नहीं मिल सकता।
शिकायतकर्ता ने मांग की है कि परिषद के रिकॉर्ड से यह स्पष्ट किया जाए कि वर्तमान निर्माण के लिए अलग से अनुमति जारी हुई है या पुरानी अनुमति के आधार पर ही काम कराया जा रहा है।
किसके अधिकार से हो रहा निर्माण?
शिकायत में निर्माण को लेकर बालकृष्ण अग्रवाल और राजू मोटवानी से संबंधित दुकान का भी उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता ने दुकान के स्वामित्व, किरायेदारी और निर्माण कराने के अधिकार से जुड़े दस्तावेजों की जांच की मांग की है।
उनका कहना है कि यदि संबंधित व्यक्ति के पास संपत्ति पर निर्माण कराने का वैधानिक अधिकार है तो उसके दस्तावेज भी सार्वजनिक होने चाहिए।
शिकायत के बाद कार्रवाई पर भी सवाल
शिकायतकर्ता का आरोप है कि उन्होंने छावनी परिषद के अधिकारियों को न्यायालय से संबंधित दस्तावेज और निर्माण की जानकारी उपलब्ध कराई, लेकिन इसके बावजूद मौके पर चल रहे कथित निर्माण को लेकर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने परिषद के अधिकारियों तथा निजी कर्मचारी राजदीप की भूमिका की भी जांच की मांग की है।
हालांकि, संबंधित अधिकारी/कर्मचारी का पक्ष खबर लिखे जाने तक उपलब्ध नहीं हो सका।
अब दस्तावेज खोलेंगे निर्माण की पूरी कहानी
मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि विवादित संपत्ति पर निर्माण की अनुमति किस दस्तावेज के आधार पर दी गई? यदि अनुमति मरम्मत की थी तो वर्तमान निर्माण किस श्रेणी में आता है? स्वीकृत क्षेत्रफल कितना था और मौके पर कितना निर्माण हो रहा है? इन सवालों का जवाब छावनी परिषद के आधिकारिक रिकॉर्ड से ही सामने आएगा।
शिकायतकर्ता ने पुलिस कमिश्नर से पूरे मामले की जांच कराने और छावनी परिषद से निर्माण संबंधी सभी अभिलेख तलब कर उनकी वैधानिकता की जांच कराने की मांग की है।
