संवाददाता: प्रिंस गुप्ता
मंडल प्रभारी पुलिस दर्पण
भदोही। सावन का पवित्र महीना शुरू होते ही कालीन नगरी भदोही पूरी तरह शिवमय हो गई है। जिले के प्राचीन शिवालयों में तड़के चार बजे से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग रही हैं। हर-हर महादेव और बोल बम के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा है।

कांवरिया गंगाजल लेकर भगवान शिव का जलाभिषेक कर रहे हैं, वहीं महिलाएं परिवार की सुख-समृद्धि तथा कुंवारी कन्याएं योग्य वर की कामना से सोमवार का व्रत रख रही हैं।

सावन माह में भदोही के साथ-साथ पूर्वांचल के विभिन्न जिलों से लाखों कांवरिया प्रयागराज के त्रिवेणी संगम से गंगाजल लेकर पैदल यात्रा करते हुए काशी विश्वनाथ धाम तक पहुंचते हैं। इस यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु भदोही जनपद के प्रमुख शिवालयों—हरिहरनाथ मंदिर (ज्ञानपुर), बड़ा शिव मंदिर (गोपीगंज), सेमराधनाथ धाम (दीघ), तिलंगेश्वरनाथ महादेव (तिलंगा), नर्मदेश्वर महादेव मंदिर (छिटनी तालाब, भदोही) तथा श्री राम-जानकी मंदिर परिसर स्थित शिवालय (सुंदरवन काटे, देवनाथपुर) में भी जलाभिषेक कर अपनी श्रद्धा अर्पित करते हैं।
सावन के प्रत्येक सोमवार और विशेष पर्वों पर इन मंदिरों में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ता है।
हालांकि आस्था के इस महासागर के बीच एक अहम सवाल भी खड़ा होता है कि क्या नई पीढ़ी इन प्राचीन शिवधामों के वास्तविक इतिहास से परिचित है?
इन मंदिरों की स्थापना कब हुई, इनके पीछे कौन-सी लोकमान्यताएं और ऐतिहासिक तथ्य जुड़े हैं, इस पर अभी भी व्यापक शोध की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
सावन का धार्मिक महत्व
सनातन परंपरा के अनुसार समुद्र मंथन से निकले हलाहल विष को भगवान शिव ने सृष्टि की रक्षा के लिए अपने कंठ में धारण किया था। विष की ज्वाला शांत करने के लिए देवताओं ने उन पर जल अर्पित किया। तभी से सावन में जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, बेलपत्र, धतूरा और भांग अर्पित करने की परंपरा चली आ रही है। मान्यता है कि इस माह में भगवान शिव की आराधना करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
भदोही के प्रमुख शिवधाम
हरिहरनाथ मंदिर, ज्ञानपुर:
विशाल तालाब के पश्चिमी तट पर स्थित यह मंदिर जिले के सबसे प्राचीन शिवालयों में गिना जाता है। सावन में यहां सुबह से देर रात तक जलाभिषेक और रुद्राभिषेक का क्रम चलता है।
बड़ा शिव मंदिर, गोपीगंज: ऐतिहासिक महत्व वाला यह मंदिर वाराणसी, प्रयागराज और विंध्याचल जाने वाले श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। सावन में यहां विशेष श्रृंगार, रुद्राभिषेक और भंडारे आयोजित होते हैं।
सेमराधनाथ धाम, दीघ: भदोही
स्थानीय मान्यता के अनुसार सेमर (सेमल) के विशाल वृक्ष के नीचे स्वयंभू शिवलिंग प्रकट होने के कारण इस धाम का नाम सेमराधनाथ पड़ा। नाग पंचमी, महाशिवरात्रि और सावन में यहां विशाल मेला लगता है।
तिलंगेश्वरनाथ महादेव, तिलंगा:
ग्रामीण अंचल का यह प्राचीन शिवालय सावन में हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बन जाता है।
नर्मदेश्वर महादेव मंदिर, छिटनी तालाब (भदोही):
नगर के प्रमुख प्राचीन शिवालयों में शामिल इस मंदिर में पूरे सावन माह प्रतिदिन रुद्राभिषेक, शिव आरती और भजन-कीर्तन का आयोजन होता है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां जलाभिषेक कर भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
श्री राम-जानकी मंदिर परिसर, सुंदरवन काटे, देवनाथपुर:
मंदिर परिसर स्थित शिवालय में सावन के दौरान विशेष पूजा-अर्चना, जलाभिषेक और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन होता है।
गांवों की सांस्कृतिक पहचान हैं शिवालय
भदोही के अधिकांश गांवों में स्थित शिव मंदिर केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि गांवों की सांस्कृतिक पहचान भी हैं। कई मंदिरों का इतिहास सैकड़ों वर्ष पुराना माना जाता है। सावन में यहां मेले, भजन-कीर्तन, अखंड रामायण और सामूहिक रुद्राभिषेक की परंपरा आज भी जीवंत है। हालांकि इन मंदिरों का प्रमाणिक इतिहास अब तक व्यवस्थित रूप से संकलित नहीं किया जा सका है।
प्रशासन भी अलर्ट
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस ने प्रमुख शिवालयों पर सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए हैं। बैरिकेडिंग, यातायात प्रबंधन, पेयजल, स्वास्थ्य सुविधाएं तथा सीसीटीवी निगरानी की व्यवस्था की गई है, ताकि श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुगम दर्शन मिल सकें।
भदोही की पहचान केवल विश्व प्रसिद्ध कालीन उद्योग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जनपद प्राचीन धार्मिक विरासत और लोकआस्था का भी महत्वपूर्ण केंद्र है। आवश्यकता इस बात की है कि हरिहरनाथ, सेमराधनाथ, तिलंगेश्वरनाथ, नर्मदेश्वर महादेव तथा अन्य प्राचीन शिवधामों के इतिहास, स्थापत्य और लोकपरंपराओं का व्यवस्थित दस्तावेज तैयार किया जाए। इससे न केवल जिले की सांस्कृतिक धरोहर संरक्षित होगी, बल्कि भदोही धार्मिक पर्यटन के मानचित्र पर भी अपनी एक विशिष्ट पहचान स्थापित कर सकेगा।
