ब्यूरो कार्यालय संवाददाता आगरा
आगरा। आगामी स्वतंत्रता दिवस के मद्देनजर विश्व धरोहर ताजमहल की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से शुक्रवार को ताजमहल के पूर्वी गेट एग्जिट पर बहु-एजेंसी मॉक ड्रिल आयोजित की गई। करीब 40 मिनट तक चले इस अभ्यास में सशस्त्र आतंकवादी हमला और संदिग्ध आईईडी (IED) मिलने की काल्पनिक स्थिति बनाकर सुरक्षा एजेंसियों की त्वरित प्रतिक्रिया, समन्वय और आपदा प्रबंधन क्षमता को परखा गया।

सुबह 10:40 बजे शुरू हुई मॉक ड्रिल में चार काल्पनिक आतंकवादियों द्वारा पूर्वी गेट पर अंधाधुंध फायरिंग की गई। प्रारंभिक हमले में एक CISF जवान को काल्पनिक रूप से घायल दर्शाया गया, जबकि एक आतंकवादी को मौके पर ही निष्प्रभावी कर दिया गया। घटना की सूचना तत्काल CISF कंट्रोल रूम को दी गई, जिसके बाद सभी सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट कर निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू कर दी गई।

इसके बाद तीन आतंकवादी स्मारक परिसर में प्रवेश कर गए, जिन्हें CISF की क्विक रिएक्शन टीम (QRT) ने फोरकोर्ट क्षेत्र में घेर लिया। CISF असॉल्ट पार्टी ने संयुक्त अभियान चलाते हुए तीनों आतंकवादियों को भी निष्प्रभावी कर दिया। इस दौरान उत्तर प्रदेश पुलिस ने ताजमहल के बाहरी क्षेत्र की घेराबंदी कर सुरक्षा व्यवस्था संभाली।
अभ्यास के अगले चरण में एप्रोच रोड के पास एक संदिग्ध लावारिस बैग मिलने की सूचना दी गई। CISF डॉग स्क्वाड और बम निरोधक दस्ते (BDDS) ने जांच में उसमें विस्फोटक होने के संकेत मिलने पर उत्तर प्रदेश पुलिस की BDDS टीम ने निर्धारित SOP के तहत संदिग्ध आईईडी को सुरक्षित तरीके से निष्प्रभावी किया।
मॉक ड्रिल के दौरान घायल जवान को मेडिकल टीम ने प्राथमिक उपचार देने के बाद एम्बुलेंस से अस्पताल भेजने की प्रक्रिया का भी प्रदर्शन किया।
इस संयुक्त अभ्यास में CISF, उत्तर प्रदेश पुलिस, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI), फायर सर्विस, CISF एवं यूपी पुलिस की BDDS टीम, डॉग स्क्वाड, SIS, LIU तथा मेडिकल टीम ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
पूरी मॉक ड्रिल का संचालन CISF यूनिट ताजमहल के कमांडेंट ऋषि कौशिक के पर्यवेक्षण में हुआ। अभ्यास के समापन पर सभी संबंधित एजेंसियों के साथ डी-ब्रीफिंग सत्र आयोजित कर सुरक्षा व्यवस्था, अंतर-एजेंसी समन्वय, संचार प्रणाली और आपातकालीन प्रतिक्रिया की समीक्षा की गई।
स्वतंत्रता दिवस से पहले आयोजित इस व्यापक सुरक्षा अभ्यास का उद्देश्य ताजमहल जैसे अति संवेदनशील स्मारक पर किसी भी संभावित आतंकी हमले या विस्फोटक संबंधी आपात स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए सुरक्षा बलों की तैयारियों को परखना और उन्हें और अधिक सुदृढ़ बनाना रहा।
