
रामकुमार कानपुर देहात
रसूलाबाद कानपुर देहात। हिंदी दिवस के अवसर पर मातृभाषा हिंदी के महत्व को एक बार फिर गर्व के साथ याद किया गया। मातृभाषा वही है जिसे बच्चा सबसे पहले अपनी माँ और अपने परिवार से सीखता है।
हिंदी दिवस पर विद्यालयों कविता पाठ भाषण प्रतियोगिताएं आयोजित की गई जहां शिक्षकों ने कहा कि जन्म के बाद बच्चा जो पहली भाषा अपने घर-आँगन में सीखता है वही उसकी मातृभाषा कहलाती है।
हिंदी केवल भाषा नहीं बल्कि हमारी संस्कृति संस्कारों और परंपराओं को जोड़ने वाला सेतु है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य अपने दिल के भावों और विचारों को सबसे सहजता से अपनी मातृभाषा में ही व्यक्त कर पाता है।
समाज और देश में हमारी भाषाई और सांस्कृतिक पहचान का मुख्य आधार हमारी मातृभाषा ही है।
इसी कड़ी में हिंदी दिवस पर एक मनमोहक प्रस्तुति ने सबका दिल जीत लिया।
नन्हे कदम प्यारीसी आवाज़ कक्षा 1 के छात्र लक्षित सिंह चौहान ने हिंदी दिवस पर अपनी मासूम और आत्मविश्वास भरी प्रस्तुति से सभी का मन मोह लिया।
नन्हे लक्षित की इस प्यारी कोशिश ने यह साबित कर दिया कि हिंदी की नींव बचपन से ही कितनी मजबूत है।
