जानिए भदोही के नाम बदलने की पूरी कहानी
संवाददाता: प्रिंस गुप्ता
मंडल प्रभारी पुलिस दर्पण
भदोही, 29 जुलाई। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरु पूर्णिमा के अवसर पर वाराणसी के सीर गोवर्धनपुर स्थित श्री गुरु रविदास मंदिर से भदोही जनपद को लेकर बड़ा ऐलान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनपद की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान “संत रविदास नगर” के नाम से ही स्थापित की जाएगी। इस घोषणा के बाद एक बार फिर जनपद के नाम का इतिहास चर्चा का विषय बन गया है।

विश्व प्रसिद्ध कालीन नगरी भदोही कभी वाराणसी जनपद का हिस्सा हुआ करती थी। प्रशासनिक सुविधा और क्षेत्र के समग्र विकास को ध्यान में रखते हुए 30 जून 1994 को इसे अलग जनपद का दर्जा दिया गया। नवगठित जिले का मुख्यालय ज्ञानपुर बनाया गया, जबकि भदोही नगर पहले से ही अपने हस्तनिर्मित कालीन उद्योग के कारण विश्व मानचित्र पर पहचान बना चुका था।
जिले के गठन के लगभग तीन वर्ष बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती के नेतृत्व वाली सरकार ने 4 दिसंबर 1997 को संत शिरोमणि गुरु रविदास के सम्मान में जिले का नाम बदलकर “संत रविदास नगर” कर दिया। इसके बाद लंबे समय तक जिले की आधिकारिक पहचान इसी नाम से बनी रही और सभी सरकारी अभिलेखों में भी यही नाम दर्ज किया जाता रहा।
इसके बाद वर्ष 2014 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की सरकार ने कैबिनेट के निर्णय के बाद 6 दिसंबर 2014 को जिले का नाम पुनः “भदोही” कर दिया। तब से सरकारी दस्तावेजों और प्रशासनिक कार्यों में भदोही नाम का प्रयोग किया जाने लगा, हालांकि आम लोगों के बीच संत रविदास नगर नाम भी समान रूप से प्रचलित रहा।
अब गुरु पूर्णिमा 2026 के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट किया कि संत गुरु रविदास की 650वीं जयंती वर्ष में उनकी स्मृति और सामाजिक समरसता के संदेश को सम्मान देते हुए भदोही जनपद की पहचान फिर से “संत रविदास नगर” के नाम से स्थापित की जाएगी। उन्होंने कहा कि संत रविदास के विचार आज भी समाज को समानता, सद्भाव और मानवता की प्रेरणा देते हैं तथा उनकी विरासत को संरक्षित करना सरकार की प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद जनपद में नई चर्चा शुरू हो गई है। सामाजिक संगठनों, बुद्धिजीवियों और स्थानीय नागरिकों ने इसे जनभावनाओं और सांस्कृतिक विरासत के सम्मान से जोड़कर देखा है।
वहीं कालीन उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि नाम परिवर्तन के बावजूद भदोही की वैश्विक पहचान ‘कारपेट सिटी’ के रूप में पहले की तरह बनी रहेगी।
भदोही के नाम बदलने का इतिहास
30 जून 1994 – वाराणसी से अलग होकर भदोही नया जिला बना।
4 दिसंबर 1997 – नाम बदलकर संत रविदास नगर किया गया।
6 दिसंबर 2014 – जिले का नाम पुनः भदोही किया गया।
29 जुलाई 2026 – मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फिर से संत रविदास नगर नाम बहाल करने की घोषणा की।
मुख्यमंत्री के इस ऐतिहासिक ऐलान के साथ ही तीन दशक से अधिक समय से बदलती रही जनपद की पहचान एक बार फिर अपने पुराने नाम की ओर लौटती दिखाई दे रही है।
यह निर्णय न केवल
प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, बल्कि संत गुरु रविदास की विरासत और जनपद की सांस्कृतिक अस्मिता से भी जुड़ा एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
