संभल से अवधेश कुमार
संभल। सनातन धर्म में श्रावण मास का अत्यंत विशेष धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व है। यह माह पूर्णतः भगवान शिव की उपासना, भक्ति, तप, संयम एवं साधना को समर्पित माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रावण मास में भगवान शिव की आराधना करने से साधक की समस्त मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं तथा जीवन में सुख, शांति, आरोग्य एवं समृद्धि का आगमन होता है।

पंडित शोभित शास्त्री
इस वर्ष श्रावण मास 30 जुलाई से प्रारंभ होकर 28 अगस्त तक रहेगा। इस संपूर्ण माह में भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना, जलाभिषेक, रुद्राभिषेक एवं शिवार्चन का विशेष महत्व है। मान्यता है कि श्रावण मास में प्रतिदिन भगवान शिव का अभिषेक, रुद्राभिषेक एवं शिवार्चन करने से भक्तों की मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं तथा भगवान भोलेनाथ की असीम कृपा प्राप्त होती है।
शिव पुराण के अनुसार जो श्रद्धालु श्रावण मास का व्रत अथवा श्रावण के सोमवार का व्रत श्रद्धा, नियम एवं भक्ति के साथ करता है, भगवान शिव उसकी समस्त मनोकामनाओं को पूर्ण करते हैं तथा उसे सुख, समृद्धि, आरोग्य और आध्यात्मिक उन्नति का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
पुराणों के अनुसार समुद्र मंथन के समय निकले हलाहल विष का पान भगवान शिव ने समस्त सृष्टि की रक्षा के लिए किया था। विष की उष्णता को शांत करने के लिए देवताओं ने उनका जलाभिषेक किया। तभी से श्रावण मास में शिवलिंग पर जल, दुग्ध, बेलपत्र, धतूरा, भांग एवं अन्य पूजन सामग्री अर्पित करने की परंपरा चली आ रही है। इसी कारण श्रावण मास शिवभक्तों के लिए अत्यंत पुण्यदायी माना गया है।
सावन के चारों सोमवार पर विशेष एवं शुभ संयोग
– प्रथम सावन सोमवार (3 अगस्त 2026) — सुकर्मा योग एवं सर्वार्थ सिद्धि योग का शुभ संयोग।
– द्वितीय सावन सोमवार (10 अगस्त 2026) — सोम प्रदोष व्रत का दुर्लभ एवं अत्यंत पुण्यदायी संयोग।
– तृतीय सावन सोमवार (17 अगस्त 2026) — नाग पंचमी के पावन पर्व का विशेष संयोग।
– चतुर्थ सावन सोमवार (24 अगस्त 2026) — सर्वार्थ सिद्धि योग एवं सावन समापन योग का शुभ संयोग।
श्रावण मास में प्रत्येक सोमवार का व्रत, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र तथा पंचाक्षरी मंत्र “ॐ नमः शिवाय” का जप विशेष फलदायी माना गया है। इस पावन मास में श्रद्धापूर्वक भगवान शिव की आराधना करने से समस्त कष्टों का निवारण होता है तथा परिवार में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है।
श्रद्धालुओं से आग्रह है कि वे श्रावण मास के प्रत्येक दिन शिवालय पहुँचकर भगवान शिव का अभिषेक, रुद्राभिषेक एवं शिवार्चन करें तथा अपने परिवार, समाज एवं राष्ट्र के सुख, शांति और कल्याण की प्रार्थना करें।
