आगरा जिला ब्यूरो चीफ नरेश कुमार की रिपोर्ट
आगरा। थाना हरीपर्वत पुलिस, साइबर सर्विलांस और काउंटर इंटेलिजेंस टीम की संयुक्त कार्रवाई में वर्ष 1996 के धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार के मामले में पिछले 30 वर्षों से फरार चल रहे ₹25-25 हजार के दो इनामी पति-पत्नी को गिरफ्तार कर लिया गया। दोनों आरोपी शास्त्रीपुरम में पहचान बदलकर रह रहे थे और पुलिस से बचने के लिए आधार कार्ड तक नहीं बनवाया था।

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार अभियुक्त सुरेन्द्र देव यादव और उनकी पत्नी के खिलाफ थाना हरीपर्वत में वर्ष 1996 में धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक साजिश तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज था। दोनों की गिरफ्तारी पर पुलिस उपायुक्त नगर द्वारा ₹25-25 हजार का इनाम घोषित किया गया था।
पूछताछ में अभियुक्त ने बताया कि वर्ष 1971 में उसने मैसर्स चन्द्रा संस इंटरप्राइजेज और वर्ष 1980 में पत्नी के नाम पर मैसर्स कृष्णा कास्टिंग फर्म शुरू की थी, जहां इंजन के पार्ट्स बनाए जाते थे। लघु उद्योग विभाग द्वारा अनियमितताएं मिलने पर दोनों फर्मों को तीन वर्ष के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया। कर्जदारों के दबाव और पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए दोनों ने अपनी संपत्ति बेच दी और मेरठ जाकर पहचान छिपाकर रहने लगे।
बाद में वर्ष 2000 में उन्होंने अपनी पहचान बदलकर एडीए से पत्नी के नाम पर शास्त्रीपुरम में एमआईजी मकान आवंटित कराया और वहीं रह रहे थे। मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने शुक्रवार को दोनों को उनके घर से गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ दर्ज मुकदमे में आगे की विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है।
