लेखराज कौशल
हापुड़ । पिलखुवा स्थित सद्दीकपुरा में लगातार बारिश के बीच मकान की छत गिरने से 52 वर्षीय अशफाक की मौत हो गई, जबकि उनका बेटा घायल हो गया। जानें हादसे की पूरी खबर और बारिश में जर्जर मकानों से जुड़े खतरे।

लगातार हो रही बारिश अब लोगों के लिए जानलेवा साबित होने लगी है। पिलखुवा कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला सद्दीकपुरा में गुरुवार तड़के एक पुराने मकान की छत अचानक भरभराकर गिर गई। हादसे के समय पिता-पुत्र घर के अंदर सो रहे थे। मलबे में दबने से 52 वर्षीय अशफाक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनका 17 वर्षीय बेटा कासिम घायल हो गया। घटना के बाद पूरे मोहल्ले में अफरा-तफरी मच गई और परिवार में मातम छा गया।
जानकारी के अनुसार, कई दिनों से लगातार हो रही बारिश के कारण मकान की छत और दीवारों में नमी बढ़ गई थी। गुरुवार सुबह अचानक तेज आवाज के साथ छत गिर पड़ी। चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग दौड़ पड़े और मलबा हटाकर दोनों को बाहर निकाला। अशफाक को बचाया नहीं जा सका, जबकि घायल कासिम को उपचार के लिए भेजा गया।
बताया जाता है कि अशफाक का परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है। उनके दोनों बेटे, 17 वर्षीय कासिम और 18 वर्षीय नाजिम मजदूरी कर परिवार का खर्च चलाते हैं। परिवार के मुखिया की असमय मौत से घर पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। मोहल्ले के लोगों ने परिजनों को ढांढस बंधाया और प्रशासन से आर्थिक सहायता की मांग की।
विशेषज्ञों के अनुसार लगातार बारिश होने पर पुराने और जर्जर मकानों की दीवारों व छतों में पानी समा जाता है। इससे ईंट, गारा और सीमेंट की पकड़ कमजोर पड़ जाती है। यदि समय रहते मरम्मत नहीं कराई जाए तो छत या दीवार अचानक गिर सकती है। ऐसे मकानों में रहना बेहद जोखिम भरा हो जाता है।
बारिश के मौसम में सिर्फ मकान गिरने का ही खतरा नहीं रहता, बल्कि दीवार ढहने, जलभराव, बिजली का करंट फैलने, पेड़ों के गिरने और कमजोर भवनों के क्षतिग्रस्त होने जैसी घटनाओं की आशंका भी बढ़ जाती है।
