एटा। जनपद पुलिस ने साइबर अपराध के विरुद्ध चलाए जा रहे विशेष अभियान ‘ऑपरेशन सीवाई-वज्र’ के अंतर्गत बड़ी सफलता प्राप्त करते हुए साइबर ठगी में संलिप्त एक गिरोह का पर्दाफाश किया है। थाना जैथरा पुलिस, जनपदीय साइबर सेल एवं विशेष अभियान दल (एसओजी) की संयुक्त कार्रवाई में दो अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया।

उनके कब्जे से 40 हजार रुपये नकद, एक एटीएम कार्ड, एक बैंक इंस्टा किट स्लिप तथा एक एंड्रॉयड मोबाइल फोन बरामद किया गया है।वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. इलामारन के निर्देशन में साइबर अपराधियों एवं म्यूल बैंक खातों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत यह कार्रवाई अपर पुलिस अधीक्षक (नगर) श्वेताभ पाण्डेय, अपर पुलिस अधीक्षक (अपराध) एवं साइबर क्राइम के नोडल अधिकारी योगेन्द्र सिंह के मार्गदर्शन तथा क्षेत्राधिकारी अलीगंज राजेश सिंह एवं क्षेत्राधिकारी साइबर नीतीश गर्ग के पर्यवेक्षण में की गई।
पुलिस के अनुसार साइबर मुख्यालय से प्राप्त डिस्ट्रिक्ट इंटेलिजेंस पैक के आधार पर संदिग्ध म्यूल बैंक खातों का विश्लेषण किया गया। जांच के दौरान थाना जैथरा में संबंधित धाराओं के अंतर्गत अभियोग पंजीकृत किया गया। इसके उपरांत मुखबिर की सूचना पर नितेश बाबू निवासी नेहरू नगर, जैथरा तथा सोभित चौहान उर्फ कल्लू निवासी ग्राम सड़क मोर्चा, थाना जैथरा को राजकीय महाविद्यालय तरगवां के समीप से गिरफ्तार कर लिया गया।
विवेचना में सामने आया कि हैदराबाद निवासी एक व्यक्ति को स्वयं को सीबीआई अधिकारी बताकर डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाया गया और उससे ठगी गई धनराशि में से आठ लाख रुपये अभियुक्त नितेश बाबू के बैंक खाते में स्थानांतरित किए गए थे। पुलिस ने बैंक अभिलेख, केवाईसी दस्तावेज, बैंकिंग लेनदेन, सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड तथा अन्य तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण कर अभियुक्तों की संलिप्तता प्रमाणित की।
जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि दोनों अभियुक्तों ने खाते में आई धनराशि को उसी दिन चेक के माध्यम से निकालकर आपस में बांट लिया था।अपर पुलिस अधीक्षक (अपराध) एवं साइबर क्राइम के नोडल अधिकारी योगेन्द्र सिंह ने बताया कि ऑपरेशन ‘सीवाई-वज्र’ के अंतर्गत साइबर मुख्यालय से प्राप्त तकनीकी सूचनाओं के आधार पर संदिग्ध म्यूल बैंक खातों की गहन जांच की गई।
बैंक अभिलेखों, सीसीटीवी फुटेज एवं अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर दोनों अभियुक्तों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया गया। उन्होंने बताया कि गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान की जा रही है तथा उनसे जुड़े बैंक खातों एवं वित्तीय लेनदेन की भी गहन जांच जारी है।पूछताछ में अभियुक्तों ने स्वीकार किया कि गिरोह म्यूल बैंक खातों के माध्यम से साइबर ठगी की रकम प्राप्त करता था और बाद में एटीएम अथवा चेक के जरिए नकद निकासी कर गिरोह के सदस्यों में उसका वितरण कर देता था।
पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही है।एटा पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, चेकबुक अथवा बैंकिंग किट किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग के लिए उपलब्ध न कराएं। यदि कोई व्यक्ति स्वयं को किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर डिजिटल अरेस्ट के नाम पर धनराशि की मांग करे तो तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930 अथवा राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।
