यूपी फतेहपुर।
जनपद में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। जिलाधिकारी फतेहपुर द्वारा बंगाली डॉक्टरों और अवैध रूप से संचालित क्लीनिकों व पैथोलॉजी सेंटरों पर नकेल कसने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है
मामला फतेहपुर जिले के शाह कस्बे का है, जहां *स्वास्तिक पैथोलॉजी और एक कथित बंगाली डॉक्टर* द्वारा कई वर्षों से बिना किसी वैध मानक के चिकित्सा कार्य धड़ल्ले से किया जा रहा है।
न डिग्री, न रजिस्ट्रेशन, फिर भी इलाज जारी
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, संबंधित बंगाली डॉक्टर के पास न तो कोई मान्यता प्राप्त डिग्री है और न ही किसी प्रकार का रजिस्ट्रेशन। इसके बावजूद खुलेआम मरीजों का इलाज किया जा रहा है। वहीं, स्वास्तिक पैथोलॉजी भी बिना किसी पंजीकरण और मानक के संचालित हो रही है।
न डॉक्टर, न सुविधा, सिर्फ खतरा
गंभीर बात यह है कि:
– पैथोलॉजी में कोई योग्य डिग्रीधारी डॉक्टर मौजूद नहीं
– किसी प्रकार का पंजीकरण नहीं
– न फायर सेफ्टी व्यवस्था
– न प्रदूषण विभाग की अनुमति
– न ही किसी मानक के अनुसार लैब संचालन
इन सभी नियमों की अनदेखी कर मरीजों की जिंदगी के साथ खुला खिलवाड़ किया जा रहा है।
गलत रिपोर्ट से जा चुकी हैं जानें
सूत्रों की मानें तो इस अवैध पैथोलॉजी की गलत रिपोर्टों के चलते कई मरीजों की जान भी जा चुकी है। इसके बावजूद संबंधित विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं होना कई सवाल खड़े करता है।
आखिर क्यों नहीं पहुंच रही जांच की आंच?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इतने लंबे समय से चल रहे इस फर्जीवाड़े पर स्वास्थ्य विभाग और जिम्मेदार अधिकारी अब तक क्यों मेहरबान हैं? क्या किसी बड़ी घटना का इंतजार किया जा रहा है?
सीएमओ का बयान
इस पूरे मामले पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) ने कहा—
“मामला संज्ञान में आया है, जल्द ही जांच कर बड़ी कार्रवाई की जाएगी।”
अब नजर कार्रवाई पर
डीएम के सख्त निर्देशों के बाद अब देखना यह होगा कि स्वास्थ्य विभाग इस मामले में कितनी तेजी और गंभीरता से कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा।
जनता की मांग
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे फर्जी डॉक्टरों और अवैध पैथोलॉजी सेंटरों को तत्काल बंद कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी निर्दोष की जान न जाए।
