लेखराज कौशल
हापुड़।
उत्तर प्रदेश के स्टांप वेंडरों और अधिकृत संग्रह केंद्र (एसीसी) संचालकों ने मुख्यमंत्री से शासनादेश संख्या 2523, दिनांक 4 जून 2026 में संशोधन की मांग करते हुए कहा है कि नई व्यवस्था लागू होने से प्रदेश के करीब 20 हजार स्टांप वेंडर और एसीसी संचालक बेरोजगारी के कगार पर पहुंच जाएंगे। उनका दावा है कि इससे करीब एक लाख लोगों की आजीविका प्रभावित होगी।

मुख्यमंत्री को भेजे गए ज्ञापन में स्टांप वेंडरों ने कहा कि वर्तमान व्यवस्था के तहत प्रत्येक स्टांप जारी करने पर स्टेशनरी, प्रिंटर, बिजली और अन्य खर्च उन्हें स्वयं वहन करना पड़ रहा है, जिससे प्रति स्टांप आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। वर्ष 2019 से बड़ी संख्या में प्रपत्र संख्या-3 का रिकॉर्ड भी उनके पास जमा है, जबकि रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी संबंधित एजेंसी की है।
ज्ञापन में कहा गया है कि छोटे मूल्य के स्टांप जारी करने में भी प्रपत्र संख्या-3 भरने की अनिवार्यता के कारण समय और कागज दोनों की बर्बादी हो रही है। स्टांप वेंडरों ने 500 रुपये तक के स्टांप पर इस व्यवस्था को तत्काल समाप्त करने की मांग की है।
स्टांप वेंडरों ने सरकार से छह प्रमुख मांगें रखते हुए स्टेशनरी खर्च का भुगतान कराने, छोटे मूल्य के स्टांप की पूर्व व्यवस्था बहाल करने, नीति निर्माण में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने, स्टांप वेंडर कल्याण कानून बनाने, लोकसेवक का दर्जा मिलने पर बीमा, चिकित्सा और अन्य सुविधाएं देने तथा सभी मूल्य वर्ग के स्टांप के लिए रंगीन कागज उपलब्ध कराने की मांग की है।
ज्ञापन में सर्वोच्च न्यायालय के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा गया है कि नई ई-पंजीकरण व्यवस्था में एसीसी को अधिकृत संस्था के रूप में समायोजित किया जाए तथा 4 जून 2026 के शासनादेश के क्रियान्वयन पर रोक लगाकर यथास्थिति बनाए रखी जाए। स्टांप वेंडरों का कहना है कि सरकार का एक फैसला हजारों परिवारों की आजीविका बचा सकता है।
