बारिश में बेबस अस्पताल, पुरानी इमारत में जलभराव से चरमराईं स्वास्थ्य सेवाएं
संवाददाता:प्रिंस गुप्ता
मंडल प्रभारी पुलिस दर्पण
भदोही। एक ओर सरकार बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर जनपद का सबसे बड़ा सरकारी स्वास्थ्य केंद्र महाराजा बलवंत सिंह राजकीय चिकित्सालय बारिश के सामने बेबस नजर आ रहा है। करोड़ों रुपये की लागत से बनी नई 100 शैय्या बिल्डिंग तैयार होने के बावजूद अब तक शुरू नहीं हो सकी है, जबकि मरीज आज भी पुरानी और जर्जर इमारत में इलाज कराने को मजबूर हैं।

मंगलवार को हुई मूसलाधार बारिश ने अस्पताल की व्यवस्थाओं की पोल खोल दी। परिसर और वार्डों में जलभराव हो गया, कई कमरों में छत से पानी टपकता रहा और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो गईं। एक्स-रे और पैथोलॉजी (लैब) जैसी महत्वपूर्ण सेवाओं पर भी असर पड़ा।
बारिश के दो दिन बाद भी अस्पताल पूरी तरह सामान्य नहीं हो सका है, जिससे मरीजों और तीमारदारों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार नई अस्पताल बिल्डिंग का निर्माण पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल के तहत कराया गया था और इसे एक प्रतिष्ठित अस्पताल समूह को हैंडओवर भी किया जा चुका है। इसके बावजूद किसी कारणवश अब तक वहां चिकित्सा सेवाएं शुरू नहीं हो सकी हैं। ऐसे में जिला अस्पताल की सभी प्रमुख सेवाएं आज भी पुरानी इमारत से ही संचालित हो रही हैं।
प्रतिदिन हजारों की संख्या में बुनकर, मजदूर, किसान, महिलाएं, बुजुर्ग और ग्रामीण क्षेत्रों से मरीज यहां इलाज के लिए पहुंचते हैं। लेकिन बारिश के मौसम में जर्जर भवन उनकी परेशानी को और बढ़ा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक पीपीपी मॉडल के तहत 100 शैय्या नई बिल्डिंग में अस्पताल का संचालन शुरू नहीं हो जाता, तब तक जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को जनहित में पहल करते हुए महाराजा बलवंत सिंह राजकीय चिकित्सालय की सेवाओं को अस्थायी रूप से नई बिल्डिंग में स्थानांतरित करने पर विचार करना चाहिए। इससे मरीजों को सुरक्षित वातावरण मिलेगा और स्वास्थ्य सेवाएं भी निर्बाध रूप से चल सकेंगी।
अब सवाल यह है कि जब करोड़ों रुपये की आधुनिक अस्पताल बिल्डिंग पूरी तरह तैयार है, तो उसका लाभ जनता को कब मिलेगा? बरसात के बीच बिगड़ती व्यवस्थाओं ने इस प्रश्न को और भी गंभीर बना दिया है। जनपदवासियों ने शासन और प्रशासन से शीघ्र निर्णय लेकर नई बिल्डिंग का उपयोग शुरू कराने की मांग की है।
