अपील लंबित रहने तक जमानत पर रिहाई का आदेश, दोषसिद्धि पर अंतिम फैसला बाकी
संवाददाता: प्रिंस गुप्ता
मंडल प्रभारी पुलिस दर्पण
भदोही। पूर्व विधायक विजय मिश्रा की पत्नी रामलली मिश्रा को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। गोपीगंज थाने से जुड़े वर्ष 2020 के मामले में मिली 10 साल की सजा पर हाईकोर्ट ने फिलहाल रोक लगा दी है। अदालत ने अपील की सुनवाई पूरी होने तक उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है।

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति राजबीर सिंह की अदालत में हुई। अदालत ने 6 अगस्त 2026 को यह आदेश जारी किया।
रामलली मिश्रा को ट्रायल कोर्ट ने धोखाधड़ी, जालसाजी, धमकी सहित कई धाराओं और आईटी एक्ट के तहत दोषी ठहराया था। इसके बाद उन्हें अधिकतम 10 साल की जेल और जुर्माने की सजा सुनाई गई थी। इस फैसले के खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में अपील दाखिल की थी।
सजा पर रोक लगाने और जमानत देने की मांग करते हुए उनके वकील ने अदालत में कई दलीलें दीं। बताया गया कि रामलली मिश्रा की उम्र 70 वर्ष है और मुकदमे के दौरान उन्हें अग्रिम जमानत मिली थी। दोषी ठहराए जाने के बाद वह करीब तीन महीने जेल में भी रह चुकी हैं।
बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि एफआईआर में मुख्य आरोप विजय मिश्रा पर लगाए गए थे और रामलली मिश्रा के खिलाफ कोई स्पष्ट आरोप नहीं था। वकील ने मामले को व्यापारिक विवाद से जुड़ा बताते हुए ट्रायल कोर्ट के फैसले पर भी सवाल उठाए।
वहीं, राज्य सरकार और शिकायतकर्ता की ओर से जमानत का विरोध किया गया। उनका कहना था कि ट्रायल कोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही रामलली मिश्रा को दोषी ठहराया है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने मामले के अंतिम फैसले पर कोई टिप्पणी नहीं की। अदालत ने फिलहाल सजा को निलंबित करने का आधार मानते हुए रामलली मिश्रा की अर्जी स्वीकार कर ली।
अदालत ने आदेश दिया कि व्यक्तिगत बंधपत्र और दो जमानतदार पेश करने पर उन्हें जमानत पर रिहा किया जाए। इनमें से एक जमानतदार परिवार का सदस्य होना जरूरी है।
हालांकि, हाईकोर्ट के इस आदेश से रामलली मिश्रा बरी नहीं हुई हैं। ट्रायल कोर्ट की दोषसिद्धि अभी बरकरार है और हाईकोर्ट में उनकी अपील पर अंतिम फैसला होना बाकी है। फिलहाल अपील के दौरान उनकी 10 साल की सजा निलंबित रहेगी और उन्हें जमानत पर बाहर आने की अनुमति मिल गई है।
