दिव्यांग को नहीं मिला हक, अपात्रों को बांट दिए कार्ड! टिकरी कला में अंत्योदय योजना पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप
गरीब का निवाला किसने छीना? बारा के टिकरी कला में राशन कार्ड आवंटन की जांच की उठी मांग, कई जिम्मेदारों पर उठे सवाल
बारा, प्रयागराज। सरकार की महत्वाकांक्षी अंत्योदय अन्न योजना का उद्देश्य समाज के सबसे गरीब, असहाय और जरूरतमंद परिवारों तक खाद्यान्न पहुंचाना है, लेकिन यमुनानगर क्षेत्र की बारा तहसील अंतर्गत ग्राम सभा टिकरी कला से सामने आया एक मामला इस योजना की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

आरोप है कि गांव में पात्रों को दरकिनार कर अपात्र व्यक्तियों को अंत्योदय राशन कार्ड जारी कर दिए गए, जबकि वास्तविक जरूरतमंद आज भी सरकारी सुविधाओं के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। ग्राम सभा टिकरी कला निवासी वीरभद्र कोल, जो पूर्णतः दिव्यांग हैं, ने जिलाधिकारी प्रयागराज को शिकायती प्रार्थना पत्र सौंपकर अंत्योदय राशन कार्ड आवंटन में भारी अनियमितता का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि वह शारीरिक रूप से पूर्णतः दिव्यांग होने के साथ-साथ आर्थिक रूप से भी बेहद कमजोर हैं और योजना की पात्रता की सभी शर्तें पूरी करते हैं, इसके बावजूद उन्हें आज तक अंत्योदय राशन कार्ड का लाभ नहीं मिल सका। वीरभद्र कोल का आरोप है कि ग्राम स्तर पर पात्रों का सही सर्वेक्षण नहीं किया गया और चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव रहा।
यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह सवाल खड़ा होना स्वाभाविक है कि आखिर पात्रों की सूची तैयार करते समय संबंधित ग्राम पंचायत, पंचायत सचिव, ग्राम प्रधान, क्षेत्रीय लेखपाल तथा पूर्ति विभाग के स्तर पर क्या प्रक्रिया अपनाई गई और किन आधारों पर पात्रों को सूची से बाहर रखा गया। शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी से मांग की है कि ग्राम सभा टिकरी कला में जारी सभी अंत्योदय राशन कार्डों का भौतिक सत्यापन कराया जाए, लाभार्थियों की आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति की जांच की जाए तथा पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही उन्होंने यह भी मांग की है कि यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता, लापरवाही या पक्षपात सामने आता है तो संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध विभागीय और कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में लंबे समय से राशन कार्ड आवंटन को लेकर असंतोष व्याप्त है। उनका आरोप है कि यदि जिला प्रशासन स्वतंत्र एजेंसी अथवा उच्च स्तरीय जांच टीम से पूरे प्रकरण की जांच कराए तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं। ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि पात्र लाभार्थियों की सूची सार्वजनिक कर सामाजिक ऑडिट कराया जाए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके। यह मामला केवल एक दिव्यांग व्यक्ति के राशन कार्ड का नहीं, बल्कि उन तमाम गरीब और जरूरतमंद परिवारों के अधिकारों से जुड़ा है, जिनके लिए सरकार योजनाएं संचालित करती है। अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि शिकायत की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों को जिम्मेदार ठहराया जाता है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
नोट: समाचार में लगाए गए आरोप शिकायतकर्ता एवं ग्रामीणों के आरोपों पर आधारित हैं। वास्तविक स्थिति प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
