फतेहपुर, बिंदकी ।
उद्घाटन’ से पहले ही ‘खाक’ में मिलने लगा 02करोड़ 82लाख का बिन्दकी ‘बस-अड्डा‘
👉सत्ता संरक्षण में हुआ गुणवत्ताविहीन काम,बस अड्डा विभाग को हुआ हैंड ओवर!
👉सत्ता की हनक के चलते मनमाने तरीके से ठेकेदार करता रहा काम!
👉उद्घाटन से पहले ही शुरू हो गई बस अड्डा की टूट-फूट!
👉भाजपा सरकार में भ्रष्टाचारियों की बल्ले-बल्ले!
👉कार्यदाई संस्था ने सत्ताधारियों के दबाव में भाजपा से जुड़े लोगों को ही दे दिया काम!
👉जनसेवा का संकल्प हुआ पूरा लेकिन भ्रष्टाचार का लगा रह गया दीमक!
👉अब क्षेत्रीय प्रबंधक जांच करा कर गड़बड़ी को ठीक कराने की कर रहे बात!
✍🏿फतेहपुर के बिंदकी विधायक जय कुमार सिंह जैकी के जिस ड्रीम प्रोजेक्ट बिंदकी रोडवेज बस स्टॉप को आधुनिक स्वरूप देने का था उसमें सरकार के 02करोड़ 82लाख रुपए लग तो गये लेकिन भ्रष्टाचार का आलम यह रहा कि बस अड्डे के उद्घाटन से पहले ही सरकारी खजाने की रकम खाक में मिलनी शुरू हो गई। गुणवत्ताविहीन कराए गए काम में भी सत्ताधारियों का ही हस्तक्षेप सामने आ रहा है जिसके चलते मानकविहीन काम ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। कहीं फ्लोर टाइल्स टूट गयी तो कहीं शौचालय की दीवार भरभरा कर गिर गई।यह हाल तब है जब विभाग को नए कलेवर का बिंदकी बस अड्डा हैंड ओवर तो कर दिया गया लेकिन अभी उद्घाटन होना बांकी है।
यूं तो भारतीय जनता पार्टी की सरकार में जीरो टॉलरेंस के दावे किए जा रहे हैं लेकिन हकीकत इससे उलट है। भ्रष्टाचार का आलम यह है कि सरकारी कामों में सत्ताधारियों का हस्तक्षेप तो है ही वहीं मनमाने तरीके से होने वाले कामों की कोई सुधि लेने वाला नहीं है। सरकारी कार्यालयों में ब्याप्त भ्रष्टाचार ने आम आदमी को तोड़ कर रखा है।

सरकारी कामकाज का यही भ्रष्टाचार लोगों की आंखों के सामने तैरता नजर आ रहा है। जिस जर्जर रोडवेज के बिंदकी बस अड्डे को विधायक जय कुमार सिंह जैकी ने आधुनिक स्वरूप देने का वादा किया वह पूरा तो हो गया लेकिन जनसेवा के संकल्प को लेकर आगे बढ़े विधायक विकास में भ्रष्टाचार के दीमक को नहीं रोक पाए। इसी का नतीजा रहा कि 02 करोड़ 82 लाख के होने वाले कामों के लिए पहले इटावा की एक फर्म को काम दिया गया लेकिन काम धीमा होने के चलते लखनऊ की फर्म को काम दे दिया गया।बात समाप्त यहीं नहीं होती है।

लखनऊ की जो फर्म काम करने के लिए आई उसने भी सत्ता के हस्तक्षेप के चलते स्थानीय दो ठेकेदारों को काम दे दिया।काम शुरू हुआ और समाप्त भी हो गया।काम की गुणवत्ता को देखना किसी ने भी मुनासिब नहीं समझा।मामला सत्ता से जुड़ा होने के चलते ठेकेदारों ने गुणवत्ता की जमकर धज्जियां उड़ाई। इसी का नतीजा रहा कि शौचालय की दीवार टूटकर गिर गई।जगह-जगह टाइल्स टूट गए और किया गया निर्माण टूटने लगा। आमजन को सुरक्षित एवं सुविधाजनक यात्रा की ओर बढ़े एक कदम में भ्रष्टाचार का दीमक ऐसा लगा कि सरकारी खजाना पानी की तरह बह गया। जीणोद्धार कराया गया बस अड्डा विभाग को हैंडोवर कर दिया गया लेकिन अभी इसका उद्घाटन नहीं किया गया है हलांकि गुणवत्ताविहीन काम को लेकर क्षेत्रीय प्रबंधक महेश कुमार ने जांच कराए जाने की बात की है।यह भी कहा है कि जिस टूटे हुए हिस्से की बात सामने आ रही है उसको किसी बस ने टक्कर मार दिया था जिसे ठीक कराने को कह दिया गया है। पर सवाल यह है कि लंबे समय से मची टूट-फूट को क्या बसें ही तोड़ रहीं हैं।भ्रष्टाचार पर पर्दा चाहे जो डाला जा रहा हो लेकिन अब तक जिम्मेदारों ने ना तो इस ओर देखना मुनासिब समझा और ना ही ठीक कराना?
