नगर निगम की कार्रवाई के बीच कॉलोनी वासियों ने बताया कि आवासीय परिसर मै दलालों का एक सक्रिय गिरोह कार्य कर रहा है यह बात भी कही जा रही है वर्षों से रह रहे परिवारों में दहशत
आगरा। फतेहाबाद रोड स्थित नगला मेवाती की काशीराम आवासीय योजना एक बार फिर चर्चा का केंद्र बन गई है। मंगलवार को नगर निगम के उप नगर आयुक्त अपनी टीम के साथ कोर्ट के आदेश का पालन कराने के लिए योजना परिसर पहुंचे और न्यायालय के निर्देशानुसार ब्लॉक संख्या 23/16 में एक आवेदक को आवंटित मकान का कब्जा दिलाया। इसके अलावा दो अन्य आवेदकों को भी उनके आवंटित मकानों का कब्जा सौंपा गया।

जानकारी के अनुसार, जिन आवेदकों को वर्षों पहले आवेदन करने के बावजूद मकान नहीं मिला था, उन्होंने न्यायालय की शरण ली थी। मामले की सुनवाई के बाद न्यायालय ने आवेदकों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए नगर निगम को संबंधित मकानों का आवंटन सुनिश्चित कराने का आदेश दिया था। इसी आदेश के अनुपालन में मंगलवार को यह कार्रवाई की गई।
हालांकि नगर निगम की कार्रवाई के साथ ही पूरी योजना की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। सूत्रों के मुताबिक, 608 मकानों वाली इस योजना में करीब 400 मकानों का आवंटन हो चुका है, जबकि लगभग 208 मकान आज भी वर्षों से खाली और जर्जर अवस्था में पड़े हैं।
वहीं कॉलोनी में पिछले करीब 10 वर्षों से रह रहे लोगों का कहना है कि उन्हें जिलाधिकारी द्वारा सूरसदन में आयोजित सार्वजनिक लॉटरी के माध्यम से वैध रूप से मकान आवंटित किए गए थे। इसके बावजूद कुछ दलालों के द्वारा आवंटन संबंधी दस्तावेज तैयार कर नए लोगों को कब्जा दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। इससे कॉलोनी के लोगों में भय का माहौल है और उन्हें आशंका है कि कहीं उनके मकान भी विवाद में न फंस जाएं।
सूत्रों का दावा है कि फतेहाबाद रोड पर स्थित इस योजना की प्राइम लोकेशन होने के कारण यहां दलालों का एक सक्रिय नेटवर्क काम कर रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब 200 से अधिक मकान खाली पड़े हैं तो नगर निगम उन्हें पात्र आवेदकों को आवंटित करने के बजाय पहले से रह रहे लोगों को परेशान क्यों कर रहा है।
उल्लेखनीय है कि इसी आवासीय योजना में एमआईएम के ज्वाइंट सेक्रेटरी मुकर्रम बेग का भी आवास है। लेकिन ताजुब की बात यह है कि मुकर्रम बैग एक सामाजिक आदमी होते हुए भी कोई इस प्रकरण के खिलाफ आवाज नहीं उठाते है। और न ही कोई इस विषय मै अधिकारियों से बात करते है। जबकि यह उनका सामाजिक दायित्व बनता है। इसके बावजूद कॉलोनी में आवंटन को लेकर लगातार विवाद सामने आने से नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय निवासियों ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराकर खाली पड़े मकानों का पारदर्शी तरीके से आवंटन कराने तथा कथित दलालों को चिन्हित कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
(नोट: दलालों पर आरोप स्थानीय लोगों और सूत्रों के दावों पर आधारित हैं।
