
…प्रदीप कुमार नायक
डॉक्टर या गुंडे? बिहार के सहरसा जिले में पत्रकारिता पर एक और काला धब्बा लगा है। सदर अस्पताल में मिड-डे मील (MDM) खाने के बाद बीमार हुए करीब 24 स्कूली बच्चों की कवरेज करने गए प्रभात खबर डिजिटल के यूट्यूब पत्रकार अभिषेक कुमार के साथ अस्पताल के डॉक्टरों और कर्मियों द्वारा बर्बर मारपीट की गई है।
क्या है पूरा मामला?
शनिवार दोपहर करीब 2:30 बजे, कहरा प्रखंड के एक सरकारी स्कूल में मिड-डे मील खाने के बाद बच्चों की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें सदर अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती कराया गया था। पत्रकार अभिषेक कुमार बच्चों का वीडियो बनाकर बाहर बरामदे में PTC कर रहे थे। आरोप है कि अस्पताल प्रबंधक की शिकायत पर अस्पताल प्रभारी डॉ. अजीत और डॉ. एसके आजाद ने उनके साथ गाली-गलौज शुरू कर दी।
पत्रकार का आरोप है कि इसके बाद सिविल सर्जन के इशारे पर डॉ. रोशन लाल, डॉ. नीरज कुमार निखिल, मो. रफीक सहित 20-25 पैरा मेडिकल छात्रों ने उन्हें घेर लिया, जबरन OT की ओर ले जाकर कमरे में बंद कर दिया और गला दबाकर पीटा गया।
मारपीट के दौरान उनकी जेब से 2500 रुपये नकद, कान का सोने का कुंडल, गले की चेन छीन ली गई और माइक-मोबाइल तोड़ दिया गया। घायल पत्रकार का इलाज श्री नारायण मेडिकल कॉलेज में चल रहा है।
प्रशासन ने क्या किया?
वीडियो वायरल होने के बाद जिलाधिकारी दीपेश कुमार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उच्चस्तरीय जांच समिति गठित कर दी है और अस्पताल प्रबंधन को मर्यादित व्यवहार के निर्देश दिए हैं। दोनों पक्षों ने थाना में आवेदन दिया है – पत्रकार ने FIR की मांग की है, तो अस्पताल ने भी पत्रकार पर हंगामा करने का आरोप लगाया है।
पत्रकारों में आक्रोश
इस घटना के विरोध में सहरसा में पत्रकारों ने जोरदार प्रदर्शन किया और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
प्रदीप कुमार नायक स्वतंत्र लेखक एवं पत्रकार का विशेष टिप्पणी:
जब डॉक्टर ही गुंडे बन जाएं और सच्चाई दिखाने वाले पत्रकार को कमरे में बंद करके पीटा जाए, तो ये सिर्फ एक पत्रकार पर हमला नहीं, बल्कि जनता के जानने के अधिकार पर हमला है। CCTV फुटेज सुरक्षित रखना और दोषी डॉक्टरों पर कड़ी कार्रवाई ही न्याय होगा।
