बेहतरीन नेतृत्व से जिला कारागार कानपुर देहात बना आदर्श सुधारगृह
कृषि, लकड़ी के फर्नीचर से लेकर मोटरसाइकिल मैकेनिक तक का प्रशिक्षण, आत्मनिर्भर बन रहे बंदी
ब्यूरो रामकुमार कानपुर देहात
माती, कानपुर देहात । कार्य व्यवहारों में इंसानियत, पद के कर्तव्यों के प्रति सजगता, निष्पक्षता एवं पारदर्शिता तथा वाणी में सरलता एवं मधुरता ने जनपद कानपुर देहात के कारागार अधीक्षक धीरज कुमार सिन्हा की एक अलग पहचान बनाई है। अपने विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों के बीच ही नहीं बल्कि सम्मानित जनप्रतिनिधियों एवं जनपद के सम्मानित अधिकारियों के बीच भी उनकी कार्यशैली की जमकर प्रशंसा हो रही है।

आदर्श कारागार की पहचान:
कारागार अधीक्षक के बेहतरीन नेतृत्व ने जिला कारागार कानपुर देहात की पहचान एक आदर्श कारागार के रूप में बना दी है। जेल नियमावली के अनुसार पूरी निष्पक्षता तथा पारदर्शिता के साथ अपने पद के कर्तव्यों के प्रति पूरी सजगता से वे प्रत्येक कार्य दिवस में पूरी तत्परता से सक्रिय रहते हैं।
हर गतिविधि पर रखते हैं नजर:
कारागार परिसर की व्यवस्थाओं पर ही नहीं बल्कि यहां निरुद्ध महिला तथा पुरुष बंदियों एवं अपने अधीनस्थ अधिकारियों तथा कर्मचारियों की हर गतिविधि पर कारागार अधीक्षक की सीधी नजर रहती है। उनका उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि सुधार कर मुख्यधारा से जोड़ना है।
सुधार और रोजगार पर विशेष जोर:
कारागार अधीक्षक द्वारा जिला कारागार में निरुद्ध बंदियों को नशा मुक्त जीवन जीने एवं समाज में एक अच्छे नागरिक का जीवन जीने की प्रेरणा दी जा रही है। अपराध की दुनिया से दूर होकर अहिंसात्मक सिद्धांतों का अनुसरण करने के साथ-साथ मेहनतकश बनकर रोजगारपरक जीवन जीने के लिए लगातार प्रेरित किया जा रहा है।
कृषि कार्य में नई ऊंचाई:
कृषि प्रधान देश होने के कारण कारागार अधीक्षक के निर्देशन में बंदियों को कारागार परिसर में स्थित कृषि भूमि पर वैज्ञानिक तरीके से खेती का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यहां मौसमी सब्जियों की बेहतरीन किस्में उत्पादित की जा रही हैं। टमाटर, भिंडी, पालक, लौकी, बैंगन जैसी सब्जियां न केवल कारागार की रसोई में उपयोग हो रही हैं बल्कि उत्पादन अधिक होने पर स्थानीय बाजार में भी भेजी जा रही हैं। जैविक खाद के उपयोग से फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में बढ़ोतरी हुई है।
हस्तकला और तकनीकी प्रशिक्षण से आत्मनिर्भरता:
कारागार परिसर में एक स्वयंसेवी संगठन के माध्यम से बंदियों को रोजगारपरक बनाने के लिए विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण दिलाए जा रहे हैं:
1. लकड़ी का काम: बंदियों द्वारा बेहतरीन किस्म के लकड़ी के फर्नीचर जैसे मेज, कुर्सी, चारपाई, अलमारी आदि तैयार किए जा रहे हैं।
2. कपड़ा उद्योग: कपड़े के मजबूत थैले, झोले व अन्य सामग्री बनाई जा रही है जो प्लास्टिक का विकल्प बन रहे हैं।
3. विद्युत सजावट: त्योहारों के लिए रंग-बिरंगी बिजली की झालरें भी बंदियों द्वारा तैयार की जा रही हैं।
4. तकनीकी प्रशिक्षण: मोटरसाइकिल मैकेनिक, बिजली मिस्त्री, नल मिस्त्री सहित अन्य व्यवसायों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि रिहाई के बाद बंदी सम्मानजनक रोजगार पा सकें।
सौम्यता और सज्जनता की हो रही प्रशंसा:
जिला कारागार कानपुर देहात के अधीक्षक की बेहतरीन कार्य प्रणाली एवं कार्य व्यवहारों में सौम्यता एवं सज्जनता की लोगों के बीच ही नहीं बल्कि अधिकारियों तथा कर्मचारियों के बीच भी जमकर प्रशंसा हो रही है। उनके प्रयासों से कारागार अब केवल बंदीगृह न रहकर सुधारगृह व कौशल विकास केंद्र के रूप में नई पहचान बना रहा है।
