अयोध्या
धर्मेंद्र सिंह
राम जन्मभूमि ट्रस्ट को तत्काल प्रभाव से किया जाए भंग- हिंदू महासभा
*राष्ट्रीय प्रवक्ता मनीष पांडेय ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर की मांग *
कहा कि जांच निष्पक्ष होने में है संदेह

राम जन्मभूमि ट्रस्ट में करोड़ों रुपए चंदें के रूप में प्राप्त की गई धनराशि की हुई हेरा फेरी, गबन, व चोरी की घटना को देखते हुए हिंदू महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता अधिवक्ता मनीष पांडेय ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर यह मांग की है कि तत्काल प्रभाव से राम जन्मभूमि ट्रस्ट को भंग किया जाए एवं इसकी गहन जांच सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड न्यायाधीशों से की करवाई जाए, श्री पांडे द्वारा प्रेषित पत्र में यह मांग भी की गई है कि क्योंकि राम जन्मभूमि का ऐतिहासिक निर्णय एवं ट्रस्ट का गठन सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार किया गया था इसलिए इसको भंग करने और इसकी जांच करने का अधिकार भी सुप्रीम कोर्ट को ही है, प्रेषित पत्र में यह मांग भी की गई है कि ट्रस्ट के द्वारा खरीदी गई अयोध्या में जमीनों के संबंध में घोटाला , फर्जी चेक के माध्यम से ट्रस्ट के बैंक खाता से पैसा निकल जाने की घटना , मंदिर के दान पत्र से करोड़ों रुपए निकाले जाने की वर्तमान घटना ,जिसमें मंदिर के ही कार्यरत कर्मचारियों को उक्त घटना में पकड़ा गया है इन सभी जांचों के अलावा राम जन्मभूमि आंदोलन में इकट्ठा किए गए 1400 करोड रुपए के लगभग कहां गए? इसका हिसाब किताब आज तक कोई नहीं दे सका है राम जन्मभूमि आंदोलन के समय अनेक सोने चांदी की ईंटें ,अन्य आभूषण ,दान के रूप में प्राप्त हुए थे वह अब कहां है? इसका भी कोई जवाब और लेखा-जोखा किसी भी व्यक्ति द्वारा नहीं दिया गया हिंदू महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता अधिवक्ता मनीष पांडेय द्वारा प्रेषित पत्र में यह भी मांग की गई है कि माननीय मुख्य न्यायाधीश महोदय वैसे तो राज्य सरकार और संघ इसकी जांच गुप्त रूप से करवा रहा है किंतु अयोध्या के प्रमुख संत इस जांच से नाराज हैं, असंतुष्ट हैं, और मीडिया के सम्मुख स्पष्ट रूप से कहा जा रहा है कि जो चोर है वहीं जांच करवाएंगे तो भला जांच निष्पक्ष कैसे हो सकती है भला? क्योंकि उन्हें लगता है की जांच निष्पक्ष नहीं होगी और पूरे मामले की जांच के दौरान लीपा पोती खानापूर्ति कर दी जाएगी, सुप्रीम कोर्ट ही इस जांच को निष्पक्ष रूप से कर सकती है ऐसा हमारा विश्वास है आधार तत्काल प्रभाव से ट्रस्ट को भंग करने की कार्रवाई करते हुए इसकी गहन जांच निष्पक्षता पूर्वक की जाए ।
