वाराणसी में पारा रिकॉर्ड तोड़ रहा है और आम जनता का घर से निकलना दूभर हो चुका है। हालात ऐसे हैं कि एक वयस्क इंसान धूप में 5 मिनट भी खड़ा नहीं रह सकता। लेकिन ऐसी जानलेवा गर्मी में भी, हमारे मासूम बच्चों के स्कूल खुले हुए हैं।
सवाल यह उठता है कि क्या इस भीषण गर्मी में बच्चों की सेहत के साथ खिलवाड़ नहीं हो रहा है? सुबह की तपिश हो या दोपहर की चिलचिलाती धूप, मासूम बच्चे और उनके माता-पिता इस मौसम में पिसने को मजबूर हैं। स्कूल आने-जाने के दौरान बच्चों के बीमार होने, डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। अभिभावक परेशान हैं, लेकिन प्रशासन मौन है।
यह विषय बेहद गंभीर और चिंताजनक है। हम वाराणसी के जिला अधिकारी (DM) और बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) से यह सीधा आग्रह करते हैं और उनका ध्यान इस ओर खींचते हैं। क्या प्रशासन को जमीनी हकीकत और इस भीषण गर्मी का अहसास नहीं है?
हम प्रशासन से मांग करते हैं कि बच्चों और उनके अभिभावकों की इस तकलीफ का तुरंत संज्ञान लिया जाए। बच्चों की सुरक्षा और उनके स्वास्थ्य को सर्वोपरि रखते हुए, या तो स्कूलों में ग्रीष्मकालीन छुट्टियां बढ़ाई जाएं, या फिर स्कूलों के समय में बदलाव का कोई ठोस आदेश जल्द से जल्द पारित किया जाए। उम्मीद है कि वाराणसी जिला प्रशासन संवेदनशीलता दिखाएगा और बच्चों के हित में जल्द ही कोई राहत भरा फैसला लेगा।
