संवाददाता प्रिंस गुप्ता
मण्डल प्रभारी पुलिस दर्पण
भदोही। दुनिया भर में अपनी बेहतरीन कालीनों के लिए पहचान रखने वाले भदोही के कालीन उद्योग को सरकारी योजनाओं से नई रफ्तार मिलने की उम्मीद जगी है। एक जिला-एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना के तहत सरकार कालीन कारोबार से जुड़े उद्यमियों और कारीगरों को पूंजी, बाजार और प्रशिक्षण के स्तर पर मदद दे रही है। निर्यातकों का मानना है कि योजनाओं का लाभ जमीन पर पहुंचने से भदोही का कालीन उद्योग अंतरराष्ट्रीय बाजार में और मजबूत होगा।

मार्जिन मनी योजना के तहत जिले के 347 लाभार्थियों को 131 करोड़ रुपये से अधिक का सब्सिडी वाला ऋण दिया गया है। इसमें 12 करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी शामिल है। इससे छोटे और मध्यम उद्यमियों को कारोबार बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
वहीं, 546 उद्यमियों को देश-विदेश के व्यापार मेलों में अपने उत्पादों का प्रदर्शन करने के लिए 6.85 करोड़ रुपये की सहायता दी गई है। इससे निर्यातकों को नए खरीदारों से जुड़ने और विदेशी बाजार में भदोही की कालीन को बढ़ावा देने का अवसर मिल रहा है।
कालीन उद्योग से जुड़े कारीगरों और युवाओं को प्रशिक्षण देने पर भी जोर दिया जा रहा है। अब तक 2,350 लोगों को प्रशिक्षण और अन्य सहायता दी गई है। इससे पारंपरिक हुनर को आधुनिक तकनीक और बदलती बाजार की मांग से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
भदोही की कालीन अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, जापान और मध्य-पूर्व समेत 88 से अधिक देशों में निर्यात की जाती है। भारत से हर साल करीब 13 हजार करोड़ रुपये की कालीन का निर्यात होता है, जिसमें भदोही की हिस्सेदारी 60 प्रतिशत से अधिक बताई जाती है।
निर्यातकों ने बताया जरूरी कदम
1- उमेश गुप्ता मुन्ना, एकमा अध्यक्ष, भदोही ने कहा कि सरकारी योजनाओं से छोटे और मध्यम निर्यातकों को बड़ा फायदा मिलेगा। आर्थिक सहायता मिलने से कारोबार बढ़ाने और नए बाजारों तक पहुंच बनाने में आसानी होगी।
2- असलम महबूब, उपाध्यक्ष, सीईपीसी ने कहा कि विदेशी बाजार में भदोही की कालीन की मांग बनी हुई है। व्यापार मेलों में भाग लेने के लिए मिलने वाली सरकारी सहायता से नए खरीदारों से संपर्क बढ़ेगा और निर्यात को गति मिलेगी।
3- श्याम नारायण यादव, कालीन निर्यातक, लकी कारपेट, भदोही ने कहा कि कालीन उद्योग हजारों परिवारों को रोजगार देता है। प्रशिक्षण और आधुनिक तकनीक की जानकारी मिलने से कारीगरों का हुनर और उत्पादों की गुणवत्ता बेहतर होगी।
4- पंकज बरनवाल, कालीन निर्यातक, भदोही कारपेट ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है। सरकार बाजार, तकनीक और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराती रहे तो भदोही का कालीन उद्योग वैश्विक स्तर पर और मजबूत स्थिति बना सकता है।
5- अब्दुल रब अंसारी, कालीन निर्यातक, आरएमसी कलेक्शन,
भदोही ने कहा कि भदोही की कालीन की पहचान पूरी दुनिया में है। जरूरत है कि कारीगरों और निर्यातकों को समय पर योजनाओं का लाभ मिले। इससे आने वाले समय में कालीन निर्यात और रोजगार दोनों में बढ़ोतरी हो सकती है।
निर्यातकों का कहना है कि सरकारी योजनाओं का सही और समयबद्ध लाभ मिलने से भदोही की कालीन सिर्फ परंपरा और पहचान नहीं, बल्कि वैश्विक बाजार में और बड़ी आर्थिक ताकत बन सकती है।
